Monday, June 4, 2012

कि विदेश से आयात कर ली हाय हमने महामारी!’राष्ट्र के जनहित में जारी –एक बार और अटल बिहारी

तिल का ताड़ बनाते हैं चिल्लाते विदेशी मूल
सफ़ेद चमडी देख इनके ह्रदय में चुभता शूल
या कहेंगे ‘नही है ग्रजुएट गई है सिर्फ़ स्कूल’
अरे मूर्ख देखो मामले को बेवज़ह देते तूल!

मर्दों के जब झूंड को ललकारती है इक नारी
तो भाग कोने में छुपे नेता हो या हो व्यापारी !
और जारी न हो जाए कहीं विज्ञप्ति ये सरकारी -
‘कि विदेश से आयात कर ली हाय हमने महामारी!’

चुनाव से पहले देखो चिल्लाती थी भाजपा सरकार -
कि’ कमल करेगा सपने साकार न कि इटली की खरपतवार’!
और बैठ सिंहासन पे देखो टपकाते थे इतनी लार
कि चिपचिपी हो जाती थी भारत कि भूमि बार-बार!

बस करो नहीं चाहिए मुझे ऐसा प्रधानमंत्री
जो आँखें खोल सोता है और बनता फिरता संतरी
हाथ में माला लिए बस करता ॐ ! हरि हरि !
समस्याएं सुलझाएंगी मानो आसमां से आ लाल परी!

मुझे यकीन है देश को बेहतर संभालेगी इक नारी
पुरूष तो अक्सर पड़े इस देश पे ही भारी !
तो लो आज में करता हूँ ये विज्ञप्ति जारी -
‘जो कर रहे हैं विरोध, उनकी गई है मति मारी!’

देखो भारत हो या इटली, मानव तो मानव है
और क्या गारंटी है कि अपना भारतीय नही दानव है ?!
‘पश्चिमी भाग में अभी दबे हजारों शव हैं
और कहते हो की भारतीय ही भारतीयों से करते लव हैं!’

अरे पगले ! वो सोनिया गाँधी है, नहीं इटली की मुसोलिनी
तू तो ऐसे भय खाता मनो तेरी आजादी छिनी
मुझे तो आने लगी है अभी से खुशबू भीनी भीनी
मुह मीठा कराओ जी, लाओ मिठाई गुड चीनी!

अंग्रेज मेरे देश को उतना न लूट पाये
जितना मेरे अपनो ने ही भारत पे जुल्म ढाए
निःसंकोच उसके हाथ में दूँगा देश की कमान
‘इटली हो या जापान, बस होना चाइये इंसान’!
                                                                                                           BY:ATAL BIHARI BAJAPAI

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