Wednesday, February 29, 2012

Minakshi Pant:रंगों कि फुहार है


रंगों कि फुहार है
बसंती रुत कि बहार है |
कोयल भी देखो गा रही
रह - रहकर राग मल्हार है |
दिशाओं से गूंज रहा
ता - ता थैया का ताल है |
हर आलम जो है थिरक रहा
प्रभु कि लीलाओं का चमत्कार है |
हिरणों कि मदमस्त छलांग में
कस्तूरी पाने कि आस है |
सूरज कि निश्छल किरणों में ,
एक अपनेपन का अहसास है |
झरनों कि कलकल धारा में
समर्पण करने कि प्यास है |
पर्वत कि ऊँची चोटियों में
सुरक्षा का एक आभास है |
ये जो सतरंगी रंगों कि
छा रही छटा मनुहार है |
ये मेरे देश में लोगो का
आपस में प्यार - सम्मान है

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